मध्य प्रदेश की सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) 2027 से पहले निवेश को तेज करने के लिए एक तीव्र अभियान शुरू किया है। इस संदर्भ में, राज्य के मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई में प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारियों से मुलाकात की, जिससे निवेशकों को प्रदेश के अवसरों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा सके।

मुख्य मंत्री यादव का मुंबई दौरा: उद्देश्य और महत्व

मुख्य मंत्री यादव का यह दौरा अमर उजाला तथा मध्य प्रदेश सरकारी पोर्टल के अनुसार स्ट. रेगिस, लोअर परेल, मुंबई में आयोजित हुआ। प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:

विज्ञापन • ADVERTISEMENT
[ Google AdSense In-Article Native Slot ]

  • प्रदेश के औद्योगिक नीति 2025 और निवेश प्रोमोशन स्कीम 2025 का परिचय देना।
  • निवेशकों के सवालों का प्रत्यक्ष समाधान करना और नीति‑निर्माताओं के बीच भरोसे का पुल बनाना।
  • ज्यादातर बड़े‑स्तर के निर्माताओं और सेवा‑सेक्टर्स को मध्य प्रदेश में स्थापित होने के लिए प्रेरित करना, ताकि जीआईएस 2027 में लक्ष्यित निवेश राशि हासिल हो सके।

रोज़मर्रा के जीवन से तुलना

आसान शब्दों में समझें: इस मुलाक़ात को आप उस समय के समान समझ सकते हैं जब घर की बड़ी मरम्मत के लिए आप गाँव के अनुभवी कारीगरों से मिलते हैं, ताकि काम की योजना, लागत और समय‑सीमा का स्पष्ट पूर्वावलोकन मिल सके। यहाँ कारीगर राज्य की उद्योग नीति और निवेश अवसर हैं, और गृहस्वामी (उद्योगपति) उन अवसरों को समझकर अपने व्यवसाय का विस्तार करवाते हैं।
निवेश के आंकड़े और लक्ष्य

मध्य प्रदेश ने 2025 में उद्योग वर्ष घोषित किया और तब से सतत् निवेश आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्रमुख आंकड़े निम्नलिखित हैं:

  • 2025‑26 वित्तीय वर्ष में ₹12,000 करोड़ की प्रतिज्ञा निवेश प्राप्त हुई, जिसमें ₹7,500 करोड़ उत्पादन‑उन्मुख क्षेत्रों में है।
  • ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 तक अतिरिक्त ₹18,000 करोड़ की लक्ष्य राशि निर्धारित की गई है।
  • निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने 10‑सेक्टर प्राथमिकता सूची तैयार की, जिसमें ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड‑प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, एग्रिबिज़नेस, हेल्थ‑टेक, सॉफ्ट‑वेयर आदि शामिल हैं।

मुख्य नीति उपाय

पर्याप्त निवेश को सुदृढ़ करने के लिए राज्य ने निम्नलिखित प्रावधान किए हैं:

  1. इन्क्यूबेशन क्लस्टर योजना: नई यूनिट्स के लिए आधी‑सुनियोजित प्लॉट, विस्तृत बुनियादी ढांचा और एक‑स्टॉप सहायता केंद्र।
  2. कर राहत एवं सब्सिडी: पहली तीन साल में आयकर में 30% छूट, तथा पूँजी निवेश पर 20% नकद सब्सिडी।
  3. परमीट‑ऑन‑डिमांड (PoD) प्रणाली: भूमि और निर्माण अनुमति प्रक्रिया को 15 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य।
  4. रोज़गार निर्माण बँड: हर नई इकाई के लिये न्यूनतम 100 निरंतर रोजगार के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन।
उद्योगपतियों की प्रतिक्रिया और आगामी कदम

मुंबई में आयोजित बैठक में कई प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों ने उपस्थित होकर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रमुख बिंदु इस प्रकार थे:

  • बुनियादी ढाँचा – विशेष रूप से बिजली, जल आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स की विश्वसनीयता के लिए सतत् सुधार की आवश्यकता।
  • कौशल विकास – स्थानीय कामगारों को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से तैयार करने के लिए अधिक शैक्षिक संस्थानों की स्थापना।
  • सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता – सभी अनुमतियों और रिवार्ड्स की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली।

इन सुझावों को सरकार ने “दैनिक जीवन के उदाहरण” के रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया: एक किराना दुकान चलाते समय माल की ढुलाई, आपूर्ति और भुगतान की स्पष्टता के बिना व्यापार अस्थिर हो सकता है, उसी प्रकार बड़े पैमाने के उद्योगों को भी सप्लाई चेन एवं नीति की स्पष्टता चाहिए।

आगे की योजना

मुख्य मंत्री यादव ने कहा कि मुंबई के बाद दिल्ली, बेंगलुरु और अहमदाबाद में भी इसी तरह की उद्योग‑व्यापी मुलाकातें आयोजित की जाएँगी। प्रत्येक बैठक में निवेशकों को व्यक्तिगत परामर्श और प्रदेश‑विशिष्ट प्रोजेक्ट प्री‑ड्यू डिलिजेंस का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, राज्य ने गवर्नमेंट‑ऑफ़‑इंडस्ट्री फोरम (GIOF) से डेटा‑ड्रिवन निर्णय‑प्रक्रिया अपनाने की घोषणा की है, जिससे निवेश‑पर्यावरण को निरंतर सुधार कर सकें।

निवेश यात्रा का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव

मध्य प्रदेश के इस निवेश‑कवायद को राष्ट्रीय स्तर पर “उद्योग‑विकास का नया मॉडल” कहा जा रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025‑26 के अनुसार, राज्य की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 7.8% तक पहुंची, जो राष्ट्रीय औसत 4.5% से अधिक है। अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने भी इस पहल को ध्यान में रखते हुए भारत‑भुगतान क्षेत्र में मध्य प्रदेश को एक रणनीतिक हब मानना शुरू किया है।

समग्र निष्कर्ष

मुख्य मंत्री डॉ. मोहन यादव का मुंबई दौरा, मध्य प्रदेश की निवेश‑प्रोमोशन रणनीति का एक प्रमुख मील‑पथ है। नीति‑उपक्रम, बुनियादी‑धाँचा सुधार और उद्योग‑संबंधी प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से राज्य न केवल जीआईएस 2027 की लक्ष्य राशि हासिल करेगा, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिये भी ठोस आधार रखेगा। इस प्रकार, प्रदेश के नागरिक और उद्योग दोनों को अधिक रोजगार, बेहतर जीवन‑स्तर और स्थायी विकास का लाभ मिलेगा।