भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही हर घर में सोने और चांदी की खरीदारी की चर्चा शुरू हो जाती है। नवरात्रि, करवाचौथ, धनतेरस और उसके बाद आने वाले शादियों के सीजन को देखते हुए घरेलू सर्राफा बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ने लगी है। शनिवार, 3 अक्टूबर को 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत लगभग 1,50,280 रुपये प्रति 10 ग्राम (15,028 रुपये प्रति ग्राम) के आसपास स्थिर बनी हुई है। वहीं आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,37,750 रुपये से 1,38,750 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में दर्ज किया गया है।

दूसरी तरफ औद्योगिक मांग और त्योहारी खरीदारी के सहारे चांदी भी मजबूत बनी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर चांदी की कीमत 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम (लगभग 235 रुपये प्रति ग्राम) के स्तर पर कारोबार कर रही है। पिछले एक महीने में आई तेजी के बाद अब बाजार एक सीमित दायरे में कंसोलिडेट कर रहा है, जिसे विशेषज्ञ खरीदारी के लिए एक संतुलित मौका मान रहे हैं।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT
[ Google AdSense In-Article Native Slot ]

प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम)

स्थानीय करों, चुंगी और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर देखा जाता है:

  • दिल्ली: 24 कैरेट सोना लगभग 1,50,450 रुपये और 22 कैरेट 1,37,900 रुपये प्रति 10 ग्राम।
  • मुंबई: 24 कैरेट 1,50,280 रुपये और 22 कैरेट 1,37,750 रुपये प्रति 10 ग्राम।
  • कोलकाता: 24 कैरेट 1,50,280 रुपये और 22 कैरेट 1,37,750 रुपये प्रति 10 ग्राम।
  • चेन्नई: 24 कैरेट 1,50,850 रुपये और 22 कैरेट 1,38,280 रुपये प्रति 10 ग्राम।
  • अहमदाबाद व जयपुर: 24 कैरेट लगभग 1,50,350 रुपये प्रति 10 ग्राम।
सरल उदाहरण से समझें मेकिंग चार्ज और हॉलमार्क का गणित

सोना खरीदते समय अक्सर आम ग्राहक इस बात से परेशान हो जाते हैं कि अखबार में छपे भाव और ज्वैलर के बिल में इतना बड़ा अंतर क्यों होता है। इसे एक आसान घरेलू उदाहरण से समझा जा सकता है।

मान लीजिए आप बाजार से 100 रुपये का सीधा कपड़ा खरीदते हैं। लेकिन जब आप उस कपड़े को दर्जी के पास सिलवाकर कुर्ता बनवाते हैं, तो दर्जी अपनी सिलाई (मेकिंग चार्ज) जोड़ता है और सरकार उस पर जीएसटी लगाती है। ठीक इसी तरह, जब आप 22 कैरेट सोने का कोई हार या अंगूठी खरीदते हैं, तो बिल में तीन चीजें जुड़ती हैं:

  1. शुद्ध सोने का आधार मूल्य: उस दिन का आधिकारिक 22 कैरेट भाव।
  2. मेकिंग चार्ज (घड़ाई शुल्क): यह साधारण गहनों पर 6 से 12 प्रतिशत और जटिल डिजाइन वाले गहनों पर 15 से 25 प्रतिशत तक हो सकता है।
  3. जीएसटी (GST): कुल मूल्य (सोना + मेकिंग चार्ज) पर 3 प्रतिशत का वस्तु एवं सेवा कर।

खरीदारी करते समय हमेशा 6 अंकों वाले अल्फान्यूमेरिक हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर की जांच अवश्य करें। बिना हॉलमार्क वाला सोना कभी न खरीदें, क्योंकि बेचते समय उसकी पूरी कीमत नहीं मिल पाती।

त्योहारी सीजन में चांदी की ओर बढ़ता मध्यवर्ग का रुझान

सोने के ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों को देखते हुए इस साल सर्राफा बाजार में एक नया और दिलचस्प बदलाव देखा जा रहा है। मध्यवर्गीय परिवारों में चांदी के सिक्कों, बर्तनों और हल्के आभूषणों की मांग में भारी उछाल आया है।

ट्रेड एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस साल नवरात्रि और धनतेरस पर चांदी की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 17 से 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। जो परिवार बजट की कमी के चलते सोने के भारी गहने नहीं खरीद पा रहे हैं, वे पारंपरिक शगुन और निवेश के लिए चांदी को पहली पसंद बना रहे हैं।

सोने की कीमतों में आगे क्या होगा? विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि सोने का दीर्घकालिक रुझान अभी भी बेहद मजबूत बना हुआ है। इसके पीछे तीन बड़े वैश्विक कारण हैं:

  • केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी: भारत की रिजर्व बैंक (RBI) समेत दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
  • भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व और यूरोप में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना (Safe Haven) मान रहे हैं।
  • ब्याज दरों में कटौती की संभावना: वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में नरमी आने से सोने में निवेश का आकर्षण और बढ़ जाता है।

कई बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मौजूदा वैश्विक हालात जारी रहे, तो 2026 के अंत तक 24 कैरेट सोना 1.70 लाख से 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को भी छू सकता है।

डिजिटल गोल्ड बनाम फिजिकल गोल्ड: कौन सा बेहतर?

यदि आपका उद्देश्य केवल बचत और मुनाफा कमाना है, तो फिजिकल ज्वेलरी (आभूषण) के बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) अधिक समझदारी भरा विकल्प हैं।

गहनों में 10 से 20 प्रतिशत पैसा मेकिंग चार्ज में चला जाता है जो दोबारा कभी वापस नहीं मिलता। इसके अलावा घर में गहने रखने पर सुरक्षा और लॉकर के खर्च की चिंता भी रहती है। वहीं ईटीएफ या डिजिटल माध्यम में आप बिना किसी मेकिंग चार्ज और सुरक्षा की चिंता के 100 रुपये से भी निवेश शुरू कर सकते हैं।

स्वतंत्र दृष्टिकोण: पारिवारिक बचत और संतुलन

भारतीय समाज में सोना केवल एक धातु या आभूषण नहीं है, बल्कि यह हर संकट में परिवार का सबसे बड़ा संबल बनकर खड़ा होता है। जब परिवार पर कोई बीमारी, बेरोजगारी या अप्रत्याशित मुसीबत आती है, तो घर में रखा सोना ही बिना किसी कागजी औपचारिकता के तुरंत आर्थिक सहारा बनता है।

त्योहारों पर अपनी क्षमता और बजट को देखकर ही खरीदारी करें। किसी देखा-देखी या दिखावे में आकर कर्ज लेकर सोना खरीदने से बचें। चरणबद्ध तरीके से छोटी-छोटी बचत से सोना या चांदी खरीदना भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव साबित होता है।