विभाग: विचार (Opinion)
विचार से जुड़ी हर बड़ी और विश्वसनीय खबर।
चींटियां हमेशा एक सीधी कतार (Line) में ही क्यों चलती हैं? जानिए फेरोमोन सिग्नल्स का राज
बिना किसी ट्रैफिक पुलिस या जीपीएस के लाखों चींटियां बिल्कुल सीधी रेखा में अनुशासित होकर कैसे चलती हैं? जानिए हाइड्रोकार्बन फेरोमोन, एंटीना के रिसेप्टर्स और सुपर-ऑर्गेनिज्म की अद्भुत संवाद प्रणाली।
ऐसी कौन सी चीज है जो ज्यादातर लोग नहीं जानते? दिमाग के 'नियंत्रित भ्रम' से लेकर ब्रह्मांड के 5 सबसे चौंकाने वाले सच
क्या आप जानते हैं कि आपकी आंखें जो दुनिया देखती हैं, वह हकीकत नहीं बल्कि आपके दिमाग द्वारा रचा गया एक 'सिम्युलेशन' है? जानिए न्यूरोसाइंस, मानव शरीर के 38 ट्रिलियन बैक्टीरिया, ब्रह्मांड के 95% अदृश्य डार्क मैटर और समय के उस रहस्य को जो 99% लोगों की जानकारी से कोसों दूर हैं।
वह कौन सा पल था जब विश्व के ज्यादातर देशों ने भारत का मज़ाक उड़ाया? धोती, गाय और साइकिल के ताने से महाशक्ति बनने की दास्तान
न्यूयॉर्क टाइम्स के उस कुख्यात कार्टून से लेकर चर्चिल की हिकारत भरी भविष्यवाणी और साइकिल पर रॉकेट ढोने के दौर तक—जब पश्चिमी दुनिया और महाशक्तियों ने भारत की गरीबी, लाचारी और अंतरिक्ष सपनों का खुलेआम उपहास उड़ाया था। जानिए कैसे भारत ने हर ताने को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर दुनिया को सिर झुकाने पर मजबूर किया।
ग्रामीण परिवर्तन के जमीनी शिल्पकार
जमीनी स्तर के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं का नेटवर्क विकेंद्रीकृत सेवा वितरण की आधारशिला है। ये कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देने के साथ-साथ समुदायों को संगठित करते हैं और ग्राम स्तर पर समय पर सहायता प्रदान करते हैं। देश भर में, आशा, आंगनव...
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
भारतीय सिनेमा के जादू को राष्ट्र नमन...
जब स्वच्छता एक जन-आंदोलन बनी
कई दशकों तक, ग्रामीण स्वच्छता देश भर में विकास से जुड़ी एक लगातार बनी रहने वाली चिंता का विषय रही। 2014 में जब स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) शुरू हुआ, तब स्वच्छता कवरेज 39 प्रतिशत था। 2019 तक, ग्रामीण भारत ने 100 प्रतिशत स्वच्छता कवरेज हासिल कर लिया। 2014 और 2019 के बीच 36 राज्यों और...
भाषा विमर्श: डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं का पुनर्जागरण और रोजगार के नए आयाम
अंग्रेजी के औपनिवेशिक प्रभुत्व को चुनौती देते हुए इंटरनेट पर हिंदी और भारतीय भाषाओं का उदय। वॉइस सर्च, लोकल कंटेंट और भाषाई तकनीकी क्रांति।
पर्यावरण चिंतन: हिमालयी पारिस्थितिकी की संवेदनशीलता और अनियंत्रित विकास का खतरा
जोशीमठ से लेकर शिमला तक भूस्खलन और बाढ़ की पुनरावृत्ति। पहाड़ों के प्राकृतिक संतुलन के साथ छेड़छाड़ किए बिना सतत पर्यटन का नया मॉडल।
आर्थिक दृष्टिकोण: भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend)—अवसर या चुनौती?
28 वर्ष की औसत आयु वाला भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। लेकिन क्या हमारे पास युवाओं को रोजगार देने के लिए पर्याप्त कौशल और औद्योगिक आधार है?
दार्शनिक चिंतन: क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता कभी मानव रचनात्मकता और संवेदनशीलता की जगह ले सकती है?
मशीनें कविता लिख सकती हैं और चित्र बना सकती हैं, लेकिन क्या उनके पास दर्द, करुणा और आत्म-चेतना है? तकनीक और मानवीय आत्मा के संबंध पर विशेष विमर्श।
संपादकीय: डिजिटल युग में सूचना की बाढ़ और सत्य का संकट—निष्पक्ष पत्रकारिता की कसौटी
अल्गोरिद्म की दुनिया में टीआरपी और व्यूज की अंधी दौड़ के बीच पत्रकारिता के मूल धर्म यानी निष्पक्षता, तथ्यात्मकता और जनसरोकार की रक्षा कैसे हो?