जिनेवा: बढ़ते वैश्विक तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने और अप्रत्याशित बाढ़-सूखे की मार झेल रही धरती को बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण मंच बन गया है। इस मंच पर सबसे बड़ा टकराव विकासशील और विकसित देशों के बीच वित्तीय सहायता को लेकर है।

समान किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC)

भारत और विकासशील देशों का स्पष्ट मत है कि औद्योगिक क्रांति के बाद से वातावरण में जमा हुए कुल कार्बन का 75% से अधिक हिस्सा अमेरिका और पश्चिमी यूरोपीय देशों द्वारा उत्सर्जित किया गया है। इसलिए स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का वित्तीय और तकनीकी भार भी उन्हीं को उठाना चाहिए।

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भारत के महत्वाकांक्षी पंचामृत लक्ष्य

  • 2030 तक 50% रिन्यूएबल ऊर्जा: भारत अपनी बिजली क्षमता का आधा हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने के लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने की ओर अग्रसर है।
  • मिशन लाइफ (LiFE): पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाने का वैश्विक जन-आंदोलन।
  • 2070 तक नेट-जीरो: देश के औद्योगिकीकरण को प्रभावित किए बिना कार्बन तटस्थता का वैज्ञानिक रोडमैप।