मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने हाल ही में एक सामाजिक‑शैक्षिक पहल की घोषणा की, जिसमें बोर्ड की संपत्तियों से उत्पन्न आय को यतीम (अनाथ) बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। इस योजना की शुरुआती चरण में 289 मेधावी विद्यार्थियों को अधिकतम ₹10,000 तक की छात्रवृत्ति दी जाएगी, जिससे उनकी स्कूल‑फी, किताबें और अन्य शैक्षणिक खर्च कवर हो सकेंगे। यह कदम प्रदेश में बाल शिक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों को व्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि और बोर्ड की आय के स्रोतवक्फ बोर्ड की आमदनी मुख्यतः बौधा, भोपाल, इंदौर आदि शहरी क्षेत्रों में स्थित वक्फ‑संपत्तियों, वाणिज्यिक जमीन, अस्पताल एवं आवासीय प्रोजेक्ट्स से आती है। इन संपत्तियों की वार्षिक आय का एक बड़ा हिस्सा अब सीधे शिक्षा‑क्षेत्र में प्रवाहित किया जाएगा, जिससे सरकार के बजट पर दबाव कम होगा और सामाजिक कल्याण पर अधिक फोकस किया जा सकेगा। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य “किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक कारणों से बीच में नहीं छूटे” है।
- लाभार्थी: 289 मेधावी यतीम छात्र/छात्राएँ, जिनकी आयु 6‑18 वर्ष के बीच है।
- आर्थिक सहायता: प्रत्येक छात्र के लिए अधिकतम ₹10,000 वार्षिक, जो सीधे स्कूल या छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।
- कुल बजट: लगभग ₹21 लाख, जो बोर्ड की वर्तमान आय से आवंटित किया गया है।