उत्तर प्रदेश की पहचान अब केवल कृषि प्रधान राज्य या पारंपरिक उद्योग तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह देश के सबसे तेजी से उभरते तकनीकी और डिजिटल पावरहाउस के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के औद्योगिक और तकनीकी परिदृश्य की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश 'असेंबली से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)' के स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुका है। राज्य में अब तक 644 मेगावाट (MW) क्षमता के अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने के ठोस प्रस्ताव जमीन पर उतर रहे हैं, वहीं 24,000 से अधिक स्टार्टअप्स और 8 यूनिकॉर्न कंपनियों के साथ प्रदेश देश के अग्रणी नवाचार केंद्रों में शामिल हो गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया', 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नीतिगत सुधार, पारदर्शी सिंगल-विंडो सिस्टम और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का एक मजबूत त्रिकोण तैयार किया है। इससे न केवल वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए उच्च तकनीक वाले लाखों रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
डिजिटल दुनिया में जब भी हम यूपीआई से भुगतान करते हैं, मोबाइल पर वीडियो देखते हैं या सरकारी योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं, तो वह सारी जानकारी कहीं न कहीं सुरक्षित रूप से जमा होती है। इसी जानकारी को सुरक्षित रखने और 24 घंटे बिजली व इंटरनेट के जरिए चलाने वाले विशाल कंप्यूटर केंद्रों को 'डेटा सेंटर' कहा जाता है।
आसान शब्दों में समझें: डेटा सेंटर को आप पूरे देश की डिजिटल तिजोरी या एक विशाल केंद्रीय डिजिटल बैंक समझ सकते हैं। जैसे बैंक में आपकी नकदी और कीमती दस्तावेज सुरक्षित रहते हैं, ठीक वैसे ही डेटा सेंटर में अरबों लोगों का डेटा, लेन-देन का रिकॉर्ड और सॉफ्टवेयर सुरक्षित रखे जाते हैं। 644 मेगावाट क्षमता का अर्थ है कि उत्तर प्रदेश में एक साथ करोड़ों उपयोगकर्ताओं का भारी डेटा प्रोसेस करने की क्षमता विकसित हो रही है, जिससे इंटरनेट की रफ्तार तेज होगी और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र देश के सबसे बड़े डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित हो चुके हैं। योट्टा (Yotta D1), हीरानंदानी ग्रुप, अडानी एंटरप्राइजेज, सिफी (Sify), एनटीटी और वेब वर्क्स जैसी दिग्गज कंपनियों ने इस क्षेत्र में अरबों रुपये का पूंजी निवेश किया है। 644 मेगावाट की क्षमता उत्तर प्रदेश को दक्षिण एशिया के शीर्ष डिजिटल स्टोरेज और क्लाउड कंप्यूटिंग कॉरिडोर में स्थापित करती है।
24,000 स्टार्टअप और 8 यूनिकॉर्न: युवाओं का बदला नजरियाकुछ वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उद्यमी अपने सपनों को साकार करने के लिए बेंगलुरु, हैदराबाद या गुरुग्राम का रुख करते थे। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। राज्य सरकार की 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2020' (संशोधित 2022) के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते राज्य में 24,000 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। इनमें से 8 स्टार्टअप्स 'यूनिकॉर्न' (यानी 1 अरब डॉलर या लगभग 8,300 करोड़ रुपये से अधिक का मूल्यांकन) का दर्जा हासिल कर चुके हैं।
राज्य के सभी 75 जिलों में कम से कम एक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर, बीएचयू वाराणसी, एकेटीयू लखनऊ और एमएमएमयूटी गोरखपुर जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर सरकार नए उद्यमियों को मेंटरशिप, तकनीकी सहायता और शुरुआती पूंजी (सीड फंड) उपलब्ध करा रही है।
स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाले प्रमुख सरकारी कदम
- स्टार्टअप फंड और वित्तीय संबल: सिडबी (SIDBI) के सहयोग से स्थापित 'यूपी स्टार्टअप फंड' के जरिए प्रारंभिक दौर के नवाचारों को वित्तीय मदद दी जा रही है।
- महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन: महिला संस्थापकों वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त 50 प्रतिशत तक का गुजारा भत्ता और सीड ग्रांट प्रदान की जा रही है।
- ग्रामीण और टियर-2/3 शहरों पर फोकस: लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा और मेरठ जैसे गैर-महानगरीय शहरों में एग्री-टेक, हेल्थ-टेक और फिन-टेक स्टार्टअप्स की बाढ़ आई है।
- सरकारी खरीद में प्राथमिकता: जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से राज्य सरकार के विभागों द्वारा स्थानीय स्टार्टअप्स के उत्पादों और सेवाओं की खरीद को सुगम बनाया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में चरणबद्ध तरीके से छलांग लगाई है। 2017 से पहले जहां राज्य में मोबाइल फोन और उनके पुर्जों की केवल बेसिक असेंबलिंग होती थी, वहीं आज देश में बिकने वाले कुल मोबाइल फोन का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उत्तर प्रदेश में तैयार होता है। अब राज्य इससे एक कदम आगे बढ़कर हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर विनिर्माण की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समीप 3,706 करोड़ रुपये की लागत से एचसीएल-फॉक्सकॉन (HCL-Foxconn) संयुक्त उद्यम की चिप पैकेजिंग और सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित की जा रही है। सेमीकंडक्टर और चिप किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे स्मार्टफोन, कार, टीवी और रक्षा उपकरणों का 'दिमाग' होते हैं। उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति लागू करने वाले देश के गिने-चुने राज्यों में शामिल हो गया है, जिसके तहत निवेशकों को पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क में छूट और सस्ती जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।
डेटा सेंटर और स्टार्टअप क्षेत्र में प्रमुख उपलब्धियां| क्षेत्र / मानक | वर्तमान स्थिति / उपलब्धि | राज्य और नागरिकों पर सीधा प्रभाव |
|---|---|---|
| डेटा सेंटर कुल क्षमता | 644 मेगावाट (स्वीकृत और निर्माणाधीन) | क्लाउड स्टोरेज, 5जी सेवाओं और एआई मॉडल ट्रेनिंग में तेजी |
| पंजीकृत स्टार्टअप्स | 24,000 से अधिक | स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और नए उद्योगों की नींव |
| सक्रिय यूनिकॉर्न | 8 कंपनियां (1 अरब डॉलर से अधिक वैल्यूएशन) | राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य के आर्थिक प्रभाव में वृद्धि |
| सेमीकंडक्टर निवेश (जेवर) | 3,706 करोड़ रुपये (एचसीएल-फॉक्सकॉन) | हाई-एंड चिप फैब्रिकेशन में आत्मनिर्भरता की शुरुआत |
| इनक्यूबेशन नेटवर्क | राज्य के 75 जिलों में विस्तृत नेटवर्क | टियर-2 और टियर-3 शहरों से तकनीकी नवाचार का विस्तार |
अक्सर यह सवाल उठता है कि बड़े डेटा सेंटर और अरबों के स्टार्टअप निवेश से एक साधारण नागरिक या छात्र को क्या लाभ मिलता है? इसके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष परिणाम आम जनजीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं:
- स्थानीय स्तर पर रोजगार: बीटेक, एमसीए, पॉलिटेक्निक और आईटीआई पास युवाओं को नौकरी के लिए अन्य राज्यों में भटकना नहीं पड़ेगा। डेटा सेंटर मैनेजमेंट, क्लाउड आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा और कोडिंग में लाखों कुशल और अर्ध-कुशल नौकरियां पैदा हो रही हैं।
- सस्ती और तेज डिजिटल सेवाएं: जब डेटा सर्वर देश और राज्य के भीतर होंगे, तो इंटरनेट लैटेंसी (डेटा आने-जाने का समय) कम होगी। इसका मतलब है कि ऑनलाइन पढ़ाई, टेली-मेडिसिन, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और डिजिटल सरकारी सेवाएं बिना रुके और तेजी से काम करेंगी।
- किसानों और छोटे व्यापारियों को मदद: राज्य के एग्री-टेक स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा के जरिए किसानों को मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता और फसलों के उचित दाम की सटीक जानकारी सीधे मोबाइल पर दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन (1 लाख करोड़) डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और स्टार्टअप्स इस लक्ष्य की रीढ़ साबित हो रहे हैं। 'निवेश मित्र' सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए 400 से अधिक सरकारी मंजूरियां पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन मिलने से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
लखनऊ में प्रस्तावित देश की पहली एआई सिटी (AI City) और कानपुर का रक्षा गलियारा (Defence Corridor) राज्य के तकनीकी ढांचे को नए आयाम दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के शब्दों में, नीति में स्पष्टता, नीयत में ईमानदारी और नेतृत्व में स्थायित्व के कारण उत्तर प्रदेश ने बीमारू राज्य की छवि को पूरी तरह तोड़कर नए भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में उड़ान भरी है।