मध्य प्रदेश में अवैध खनन और खनिजों के गैर-कानूनी परिवहन पर नकेल कसने के लिए मोहन यादव सरकार ने तकनीक का सबसे बड़ा पहरा लगा दिया है। अब तक रेत, गिट्टी और पत्थरों की अवैध ढुलाई करने वाले माफिया जिन शातिराना हथकंडों के जरिए जांच चौकियों से बच निकलते थे, उन सभी रास्तों को डिजिटल तकनीक से सील कर दिया गया है। खनिज साधन विभाग ने प्रदेशभर में खनिज ढोने वाले सभी भारी वाहनों, ट्रकों और डंपरों के लिए फास्टैग (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी आरएफआईडी टैग) अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही राज्य के संवेदनशील परिवहन मार्गों पर 40 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मानवरहित ई-चेक गेट सक्रिय कर दिए गए हैं।
इस नई तकनीकी व्यवस्था का सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई ट्रक चालक कैमरों से बचने के लिए नंबर प्लेट उतार लेता है, उस पर कीचड़ या ग्रीस पोत देता है, या नंबर बदल देता है, तब भी वह सिस्टम की नजरों से बच नहीं पाएगा। जैसे ही वाहन चेक गेट से गुजरेगा, विंडशील्ड पर लगा फास्टैग सेंसर द्वारा रीड कर लिया जाएगा और एआई कैमरे उस वाहन की पूरी कुंडली और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट पास (ई-टीपी) का मिलान कुछ ही सेकंडों में कर लेंगे।
मध्य प्रदेश के नर्मदा, चंबल, बेतवा, केन और सोन नदी के कछारों से निकलने वाली रेत और बुंदेलखंड व ग्वालियर-चंबल अंचल से निकलने वाले पत्थरों के अवैध परिवहन को लेकर लंबे समय से शिकायतें आती रही हैं। पूर्व में जब स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरे लगाए गए थे, तो माफिया ने उसका तोड़ निकाल लिया था। चालक अक्सर चेक पोस्ट आने से कुछ दूरी पहले ही नंबर प्लेट पर गीली मिट्टी, कालिख या गोबर लेप देते थे, नंबर प्लेट को मोड़ देते थे या रात के अंधेरे में नंबर प्लेट ही खोलकर केबिन में रख लेते थे। इसके चलते कैमरे गाड़ी का नंबर नहीं पढ़ पाते थे और चालान या निगरानी की प्रक्रिया रुक जाती थी।
इसे एक साधारण घरेलू उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे किसी घर के मुख्य दरवाजे पर लगा सीसीटीवी कैमरा किसी अजनबी का चेहरा देखकर पहचानता है, लेकिन यदि वह व्यक्ति मास्क या हेलमेट पहन ले तो कैमरा धोखा खा जाता है। अब सरकार ने घर में ऐसा सिस्टम लगा दिया है जो चेहरे के बजाय जेब में रखे डिजिटल पहचान पत्र (स्मार्ट कार्ड) से पहचान करता है। भले ही चेहरा ढका हो, डिजिटल कार्ड के सिग्नल से दरवाजा और सुरक्षा प्रणाली तुरंत जान लेगी कि आने वाला कौन है। ठीक इसी तर्ज पर फास्टैग और आरएफआईडी तकनीक काम करेगी।
प्रमुख सचिव के कड़े निर्देश: जिला कलेक्टर्स को मिली सीधी जिम्मेदारीखनिज साधन विभाग के प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स और खनिज अधिकारियों को इस संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, प्रदेश के ई-खनिज पोर्टल पर पंजीकृत सभी व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य रूप से चालू और वैध फास्टैग लगा होना चाहिए।
प्रशासनिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई वाहन बिना फास्टैग के खनिज परिवहन करता पाया गया, या फिर फास्टैग से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, उसे खुरचने या किसी अन्य वाहन का टैग लगाने का प्रयास किया गया, तो इसे गंभीर आपराधिक धोखाधड़ी माना जाएगा। ऐसे वाहनों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ ई-खनिज पोर्टल से उनका पंजीयन तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा और उन्हें हमेशा के लिए खनिज ढुलाई से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
एआई आधारित मानवरहित ई-चेक गेट कैसे करते हैं काम?मध्य प्रदेश में स्थापित किए गए 40 से अधिक अत्याधुनिक ई-चेक गेट पूरी तरह स्वचालित हैं। इन चौकियों पर मानवीय हस्तक्षेप को शून्य कर दिया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी, सांठगांठ या राजनीतिक दबाव की गुंजाइश न रहे। इस निगरानी तंत्र के मुख्य तकनीकी घटक इस प्रकार काम करते हैं:
- आरएफआईडी और फास्टैग रीडर: सड़क के ऊपर लगे उच्च क्षमता वाले सेंसर वाहन की गति धीमे किए बिना उसकी विंडशील्ड पर लगे टैग को स्कैन कर लेते हैं।
- 360-डिग्री एआई हाई-स्पीड कैमरे: ये कैमरे वाहन के आगे, पीछे, दोनों तरफ और ऊपर से उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें खींचते हैं। इनसे वाहन के बॉडी स्ट्रक्चर, एक्सल की संख्या और वाहन की लोडिंग स्थिति का सटीक डेटा एकत्र होता है।
- इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट पास (e-TP) ऑटो-मैचिंग: फास्टैग स्कैन होते ही सिस्टम तुरंत राज्य के ई-खनिज डेटाबेस से जुड़ता है। यह जांचता है कि संबंधित वाहन को वैध खनिज परिवहन पास जारी हुआ है या नहीं, पास की समय-सीमा क्या है और अनुमत मात्रा कितनी है।
- ओवरलोडिंग और मार्ग विचलन की पहचान: यदि वाहन तय रूट के बजाय किसी अन्य रास्ते से जा रहा है या स्वीकृत क्षमता से अधिक वजन ले जा रहा है, तो सिस्टम स्वतः विसंगति (अलर्ट) दर्ज कर लेता है।
- कंट्रोल रूम को रियल-टाइम अलर्ट: अवैध या संदिग्ध पाए जाने वाले हर वाहन की जानकारी तुरंत राज्य स्तरीय केंद्रीय कमान केंद्र और संबंधित जिले के उड़नदस्ते (फ्लाइंग स्क्वॉड) के पास पहुंच जाती है।
राजस्व हानि और पर्यावरण विनाश पर दोहरा प्रहार
अवैध खनन न केवल सरकारी खजाने को हर साल करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और टैक्स का नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल स्तर और प्राकृतिक जैव विविधता के लिए भी जानलेवा साबित होता है। भारी भरकम ओवरलोड डंपरों की अनियंत्रित आवाजाही से ग्रामीण और प्रांतीय सड़कें समय से पहले उखड़ जाती हैं, जिसके पुनर्निर्माण में जनता के टैक्स का भारी पैसा खर्च होता है।
इस नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था से शासन को दोहरे मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पहला, वास्तविक समय में खनिजों की आवाजाही ट्रैक होने से रॉयल्टी की चोरी बंद होगी, जिससे राज्य के राजस्व में सीधा इजाफा होगा। दूसरा, तय सीमा से अधिक खनन और अवैध रूटों पर चलने वाले माफिया पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन रुकेगा।
पारदर्शिता का नया दौर: आंकड़ों और प्रक्रियाओं की कड़ी निगरानीखनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली को लागू करने से पहले विभिन्न जिलों के परिवहन संघों और खनिज पट्टाधारकों (लीज धारकों) को अपने वाहनों का डेटाबेस अपडेट करने का समय दिया गया था। अब किसी भी खदान से खनिज लोड करने से पहले ट्रांसपोर्टर को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन का फास्टैग सक्रिय है और ई-खनिज आईडी से लिंक है।
- 40 से अधिक चेक गेट: प्रदेश की अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय सीमाओं पर सक्रिय किए गए हैं।
- शून्य मानवीय दखल: चेक गेट पर किसी भी गार्ड या कर्मचारी द्वारा मैन्युअल पर्ची काटने या रोकने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
- सख्त दंडात्मक प्रावधान: टैग विहीन वाहन पाए जाने पर मोटर यान अधिनियम और मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन और भंडारण का निवारण) नियमों के तहत जब्ती और राजसात की कार्रवाई होगी।
- कालातीत पास की रोकथाम: एक ही ई-ट्रांजिट पास पर दिनभर में कई फेरे लगाने के फर्जीवाड़े को यह सिस्टम स्वतः पकड़ लेगा, क्योंकि हर फेरे का समय और फास्टैग लॉग केंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा।
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का यह समन्वय मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। जब सड़क पर पहरा देने वाला सिपाही कोई इंसान न होकर एक निष्पक्ष, चौबीसों घंटे जागने वाला एआई एल्गोरिदम और फास्टैग सेंसर हो, तो वहां सिफारिश, भय या प्रलोभन का कोई असर नहीं होता। नंबर प्लेट छिपाने का पुराना दांव अब माफिया को कानून के लंबे हाथों से नहीं बचा पाएगा। सरकार का यह कदम साबित करता है कि प्राकृतिक संपदा की रक्षा और पारदर्शी शासन के लिए तकनीक का इस्तेमाल ही सबसे प्रभावी हथियार है।