नई दिल्ली: भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण संघ में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण लोकतंत्र की रीढ़ है। 16वें वित्त आयोग के विचारार्थ विषयों (Terms of Reference) पर देश भर के मुख्यमंत्रियों और वित्त मंत्रियों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

विभाज्य कर पूल (Divisible Tax Pool) का विवाद

दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि वे केंद्र को सबसे अधिक कर राजस्व देते हैं और जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे हैं, किंतु वित्त आयोग के फॉर्मूले में उन्हें कम हिस्सा मिलता है। वहीं अधिक जनसंख्या वाले उत्तर भारतीय राज्यों को बुनियादी ढांचे और गरीबी उन्मूलन के लिए अधिक केंद्रीय सहायता की आवश्यकता होती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT
[ Google AdSense In-Article Native Slot ]

मुफ्त योजनाओं (Freebies) पर संतुलन

  • राजकोषीय उत्तरदायित्व (FRBM Act): आयोग इस बात पर विचार कर रहा है कि राज्यों के चुनावी वादों से उनके राजकोषीय घाटे और भावी पीढ़ियों पर कर्ज का असहनीय बोझ न पड़े।
  • सेस और सरचार्ज में हिस्सेदारी: राज्यों की पुरानी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले सेस और सरचार्ज को भी विभाज्य पूल में शामिल किया जाए।

सहकारी संघवाद की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच कैसा संतुलन साधा जाता है।