जब भी आप किसी हवाई अड्डे (Airport) के रनवे की ओर देखते हैं, तो एक बात तुरंत ध्यान आकर्षित करती है—चाहे एयर इंडिया हो, इंडिगो, अमीरात या लुफ्थांसा—लगभग 90 प्रतिशत से अधिक वाणिज्यिक यात्री विमान (Commercial Aircraft) मुख्य रूप से सफेद रंग (White Paint) के ही रंगे होते हैं। केवल उनकी पूंछ (Tail) या बॉडी के छोटे से हिस्से पर एयरलाइन का लोगो और ब्रांडिंग रंग होता है।
1. थर्मल रिफ्लेक्शन और केबिन तापमान नियंत्रण
हवाई जहाज 30,000 से 40,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ते हैं। इतनी ऊंचाई पर वायुमंडल की ओजोन परत पतली होती है और विमान पर सीधे सूर्य की घातक पराबैंगनी (UV) किरणें और प्रचंड सौर विकिरण (Solar Radiation) पड़ता है। सफेद रंग प्रकाश का सबसे बड़ा परावर्तक (Reflector) है। यह लगभग 99% सौर किरणों को तुरंत वापस अंतरिक्ष में लौटा देता है।
- यदि विमान को गहरे रंग (काले, नीले या लाल) में रंगा जाए, तो वह सूर्य की भारी गर्मी को सोख लेगा।
- जमीन पर खड़ी स्थिति में धूप में विमान का आंतरिक तापमान 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाएगा, जिससे यात्रियों को ठंडा करने के लिए एयर कंडीशनिंग सिस्टम पर भारी लोड पड़ेगा और अतिरिक्त एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) खर्च होगा।
2. 250 किलोग्राम अतिरिक्त वजन और ईंधन की खपत
एक बोइंग 777 या एयरबस A350 जैसे बड़े विमान को पूरा रंगने के लिए लगभग 250 से 300 किलोग्राम पेंट की आवश्यकता होती है। गहरे रंगों और जटिल मल्टी-कलर डिज़ाइनों के लिए पेंट की कई परतें (Coats) लगानी पड़ती हैं, जिससे विमान का कुल वजन 200 से 250 किग्रा तक बढ़ जाता है। विमानन उद्योग में 1 किलोग्राम अतिरिक्त वजन का अर्थ है पूरे वर्ष में लाखों रुपयों का अतिरिक्त ईंधन खर्च। सफेद रंग की एक हल्की परत से विमान का वजन न्यूनतम रहता है।
3. संरचनात्मक दरारों और तेल रिसाव की त्वरित पहचान
उड्डयन सुरक्षा में नियमित रखरखाव (Maintenance Inspection) सबसे अहम होता है। सफेद सतह पर किसी भी प्रकार की धातु की दरार (Metal Fatigue Crack), डेंट, तेल का रिसाव (Oil Leakage) या पक्षी के टकराने (Bird Strike) का निशान इंजीनियरों को दूर से ही आसानी से दिखाई दे जाता है। गहरे रंग पर सूक्ष्म दरारों का पता लगाना बेहद कठिन होता है।
4. सोलर रेडिएशन से बचाव और पेंट की लंबी उम्र
रंगीन पेंट सूर्य के तीव्र पराबैंगनी विकिरण के कारण कुछ ही महीनों में उड़ने (Fading) और ऑक्सीडाइज होने लगता है, जिससे विमान को बार-बार दोबारा पेंट कराना पड़ता है। एक वाणिज्यिक विमान को पेंट करने में 1.5 करोड़ से 3 करोड़ रुपये का खर्च आता है। सफेद पेंट कई वर्षों तक धूप में बिना फीके पड़े अपनी चमक बनाए रखता है।