अहमदाबाद: जब शहर के स्ट्रीट लाइट अपने आप प्राकृतिक रोशनी के अनुसार जलते-बुझते हैं, कचरा पेटी भरने पर सफाई वाहन को स्वतः अलर्ट चला जाता है, और एआई कैमरे ट्रैफिक के घनत्व को मापकर ग्रीन लाइट की अवधि तय करते हैं—तो इसे कहते हैं "इंटरनेट ऑफ थिंग्स" (IoT) संचालित स्मार्ट सिटी।

इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स (ICCC)

भारत के 100 से अधिक शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। यह पूरे शहर का डिजिटल मस्तिष्क होता है, जहां हजारों सीसीटीवी कैमरे, वायु गुणवत्ता सेंसर, जीपीएस युक्त नगर निगम वाहन और जल वितरण पाइपलाइन एक ही स्क्रीन पर रीयल-टाइम में जुड़े होते हैं।

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IoT के प्रमुख शहरी लाभ

  • जल संरक्षण और रिसाव पहचान: भूमिगत पाइपलाइनों में लगे एकॉस्टिक सेंसर पानी के रिसाव को तुरंत पकड़ लेते हैं, जिससे लाखों लीटर स्वच्छ पेयजल बर्बाद होने से बचता है।
  • ऊर्जा की बचत: स्मार्ट एलईडी लाइटिंग नेटवर्क से नगर निगमों के बिजली बिल में 30% से 40% तक की कमी आई है।
  • आपातकालीन आपदा प्रतिक्रिया: बाढ़ या जलजमाव की स्थिति में जल-स्तर सेंसर पूर्व चेतावनी जारी करते हैं, जिससे जान-माल की रक्षा सुनिश्चित होती है।

5G और लो-पावर वाइड-एरिया नेटवर्क (LPWAN) के प्रसार के साथ भारतीय शहर अधिक पर्यावरण-अनुकूल और नागरिकों के लिए सुगम बन रहे हैं।