नई दिल्ली: जनरेटिव एडवरसैरियल नेटवर्क्स (GAN) और डिफ्यूजन मॉडल्स की बदौलत अब किसी भी व्यक्ति का चेहरा, हाव-भाव और आवाज इतनी बारीकी से कॉपी की जा सकती है कि आंखों और कानों को धोखा हो जाए। चुनावों, वित्तीय धोखाधड़ी और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने में डीपफेक तकनीक आज एक बड़ा वैश्विक संकट बन चुकी है।

डीपफेक वीडियो की पहचान के आसान संकेत

यद्यपि एआई निरंतर बेहतर हो रहा है, फिर भी अधिकांश डीपफेक में कुछ ऐसी सूक्ष्म विसंगतियां छूट जाती हैं जिन्हें ध्यानपूर्वक देखकर पकड़ा जा सकता है:

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  • पलकों का असामान्य झपकना: नकली वीडियो में व्यक्ति की पलकें या तो बहुत कम झपकती हैं या उनका तालमेल अप्राकृतिक होता है।
  • चेहरे और गर्दन की त्वचा का रंग: रोशनी (Lighting) का कोण चेहरे और पृष्ठभूमि से मेल नहीं खाता। कानों, बालों के किनारों और ठोड़ी के पास धुंधलापन दिखाई देता है।
  • होंठों का संवाद से बेमेल होना: बोले जा रहे शब्दों और होंठों की गति (Lip-sync) में कुछ मिलीसेकंड का सूक्ष्म अंतर होता है।

वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड से कैसे बचें?

आजकल किसी रिश्तेदार की आवाज में कॉल करके तत्काल पैसे मांगने वाले फ्रॉड आम हो गए हैं। ऐसी स्थिति में कॉल काटकर तुरंत उस रिश्तेदार के वास्तविक नंबर पर दोबारा कॉल करके पुष्टि करें। परिवार में एक "सीक्रेट कोड वर्ड" तय रखें जो केवल संकट के समय आपातकाल की पुष्टि के लिए इस्तेमाल किया जाए।